पर्यटकों के लिए पर्यटन का अद्भुत केन्द्र बना कबीरधाम जिला

कवर्धा, कबीरधाम जिले की पहचान पुरातत्व, पर्यटन और दर्शनीय स्थलों के रूप में बन रही है। वनों से आच्छादित इस कबीरधाम जिले में पुरातात्विक महत्व के ऐसे कई स्थल और आस्था के मंदिर विद्यमान है, जिसके कारण यह पर्यटन की दृष्टिकोण से बहुत महत्व रखता है। 11वी शताब्दी के फणीनांगवंशी काल में निर्मित भोरमदेव मंदिर की पहचान पर्यटन की दृष्टि से छत्तीसगढ़ के विश्व पर्यटन मानचित्र पर भी रेखांकित हो रही है। इसके अलावा पर्यटन की दृष्टि से पुरातत्व महत्व के स्थल के रूप में पचराही, छेरकी महल, मडवा महल,राजाबेंदा चिल्फी,बिरसा लोहारा, सतखण्डामहल हरमो भी अपनी विशिष्ट पहचान एक पुरात्व महत्व के स्थ्ल के रूप में बन रही है। राज्य शासन ने पर्यटन एवं पुरात्तव विभाग द्वारा इन पर्यटन स्थलों को विकसित करने के लिए अंधोसंचना के क्षेत्र में व्यापक कार्य किए जा रहे है। प्राचीन भोरमदेव मंदिर में पर्यटकों के लिए उद्यान विकसित किए गए है वहीं मंदिर के ठीक सामने प्राचीन सरोवर का सौदर्यीकरण,तथा लक्ष्मण झुला का निर्माण किया गया है तथा पर्यटकों के मनोरंजन के लिए प्राचीन सरोवर में वोटिंग की व्यवस्था की गई हैं,जिससे स्थानीय समूह द्वारा संचालित किया जा रहा है। जिला प्रशासन तथा भोरमदेव प्रबंध तीर्थ कारिणी एवं जनसामान्य के विशेष सहयोग से प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी सावन माह के प्रथम सोमवार 25 जुलाई 2016 को कवर्धा के प्राचीन मंदिर बुढ़ा महोदव मंदिर से पदयात्रा प्रारंभ होगी। उल्लेखनीय है कि जिले के ऐतिहासिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, पुरातात्विक एवं पर्यटन महत्व के प्राचीन मंदिर भोरमदेव मंदिर के वैभव तथा महत्ता को ध्यान मंे रखते हुए भोरमेदव महोत्सव तथा पदयात्रा का आयोजन निरंतर किया जा रहा है।

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